- लोकपरंपरा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का संगीतमय संगम : कल्पना
लोकगायिका कल्पना पटवारी की छठ गीतमाला का पहला गीत ‘जगत के पालक दीनानाथ’ रिलीज होते ही श्रोताओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है। यह गीत म्यूजिक बॉक्स कल्पना पटवारी ऑफिशियल यूट्यूब चैनल से जारी किया गया है। गीत में व्रती भगवान सूर्य को संसार का पालनकर्ता मानकर उनसे अपनी पीड़ा सुनाती है और जीवन के अंधकार में आशा की किरण देने की प्रार्थना करती है। गीत में भक्त का विश्वास व्यक्त होता है कि दीन-दुखियों की पुकार सुनने वाले दीनानाथ उसकी अर्जी भी स्वीकार करेंगे।
छठ गीतमाला ‘ए लिविंग ट्रेडिशन’ के अंतर्गत भोजपुरी गीत ‘जगत के पालक दीनानाथ’ को कल्पना पटवारी ने स्वर दिया है। गीत के बोल हृदय नारायण झा ने लिखे हैं और इसकी धुन कल्पना पटवारी ने तैयार की है। संगीत संयोजन अर्जित श्रीवास्तव ने किया है, जबकि गिटार, स्ट्रोक्स और बेस की जिम्मेदारी सुमन बागानी ने निभाई है।
वहीं, कल्पना पटवारी ने बताया कि इस गीत में छठ व्रती की भक्ति, समर्पण और भगवान सूर्य के प्रति अटूट विश्वास को स्वर देने का प्रयास किया गया है। गीत में व्रती स्वयं को असहाय मानते हुए सूर्यदेव की महिमा और उनकी कृपा से लाभान्वित भक्तों का स्मरण करती है। उन्हें विश्वास है कि जिस तरह सूर्यदेव की कृपा से दुखियों को सुख और निराश लोगों को आशा मिलती है, उसी तरह उनकी भी पुकार सुनी जाएगी।
छठ महापर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने के उद्देश्य से इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इन्टैक) द्वारा तैयार डोजियर वर्ष 2026 में यूनेस्को को भेजा गया है। इसमें गीतकार हृदय नारायण झा द्वारा संकलित छठगीत भी शामिल हैं। इन्टैक की पुस्तक ‘छठगीत (सर्व सौभाग्यदायकम्)’ में मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका के पारंपरिक गीतों के साथ हृदय नारायण झा के स्वरचित गीत भी शामिल हैं।
इसी पुस्तक में शामिल सात गीतों को कल्पना पटवारी ने ‘छठ गीत माला – ए लिविंग ट्रेडिशन’ के रूप में स्वर दिया है। यह संगीतमय संकलन इस वर्ष छठ महापर्व के अवसर पर रिलीज होने जा रहा है। ‘जगत के पालक दीनानाथ’ इसका पहला गीत है। संकलन में मैथिली के ‘चारि पहर राति जल थल सेविलहुँ’ और ‘कातिक मास इजोरिया’, भोजपुरी के ‘दरसन माँगीला तोहार’, मगही के ‘छोटी मुटी मालिन बेटी’, अंगिका के ‘छठि मइया अइतई अंगनमा’ और बज्जिका के ‘रिमझिम बुन्दवा बरसि गेल’ शामिल हैं। पाँच भाषाओं के इन सात छठगीतों को कल्पना पटोवारी की आवाज़ में एक साथ सुनना एक दुर्लभ और सुंदर संयोग है—लोकपरंपरा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का संगीतमय संगम।

